इस ऑडियोबुक के बारे में
अंतोन चेख़व की इस कथा में एक प्रसिद्ध, वृद्ध प्रोफ़ेसर अपने जीवन का लेखा-जोखा करते हैं। वैज्ञानिक प्रतिष्ठा, सम्मान और परिवार होने के बावजूद वे भीतर गहरी रिक्तता अनुभव करते हैं। बीमारी और अनिद्रा उन्हें अपने संबंधों तथा विश्वासों को नए सिरे से देखने के लिए विवश करती हैं।
निकोलाय स्तेपानोविच अपनी पत्नी, बेटी और सहकर्मियों के बीच रहते हुए भी उनसे दूर महसूस करते हैं। उन्हें लगता है कि उनके जीवन में कोई ऐसी व्यापक धारणा नहीं है जो सारी उपलब्धियों को अर्थ दे सके। उनकी शिष्या और संरक्षण में पली कात्या के साथ संबंध में आत्मीयता की संभावना बची है, लेकिन उसके कठिन प्रश्नों का उत्तर देना भी आसान नहीं होता।
चेख़व बाहरी सफलता और आंतरिक संतोष के अंतर को बिना बनावटी समाधान दिए चित्रित करते हैं। यह आत्मचिंतन, अकेलेपन और जीवन के अर्थ की खोज पर केंद्रित रचना है। मनोवैज्ञानिक गहराई तथा शांत लेकिन बेचैन कर देने वाली कथाएँ पसंद करने वाले पाठकों को यह विशेष रूप से आकर्षित करेगी।