इस ऑडियोबुक के बारे में
इवान श्मेल्योव का अधूरा उपन्यास रूसी सैन्य रेजिमेंट की दुनिया में जाता है, जहाँ दिनचर्या, निजी रिश्ते और सार्वजनिक तनाव साथ हैं। कर्तव्य तथा आज्ञापालन पर बनी संस्था में अधिकारी और सैनिक अलग अपेक्षाएँ लाते हैं। सदस्यों के लिए रेजिमेंट का अर्थ केवल पद से नहीं समझा जा सकता।
कथा बातचीत, घरेलू चिंताओं और सैन्य परिसर से बाहर की मुलाकातों को जगह देती है। व्यक्तिगत भावना अनुशासन की माँग के पास है। सामाजिक मतभेद व्यवस्थित दिखते जीवन में पहुँचते हैं। बड़ी सत्ता का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी के बीच भी पात्र व्यक्तिगत प्रतिक्रिया देते हैं।
कृति सेवा, एकजुटता और सार्वजनिक भूमिका तथा निजी निर्णय में सामंजस्य की कठिनाई देखती है। अधूरापन व्यापक योजना खुली छोड़ता है। फिर भी बची कथा सैन्य जीवन को मानवीय संबंधों के जाल की तरह दिखाती है, जिसे घोषित आदर्श और ऐतिहासिक परिस्थितियों के दबाव दोनों गढ़ते हैं।