इस ऑडियोबुक के बारे में
सिग्मंड फ़्रायड स्वप्नों को अर्थहीन टुकड़े मानकर छोड़ने के बजाय व्याख्या योग्य अनुभव मानते हैं। अपने और दूसरों के स्वप्नों से वे याद की गई छवियों तथा तुरंत चेतना में न आने वाले विचारों का संबंध विकसित करते हैं। स्वप्न का परिचित अनुभव मानसिक जीवन के उनके सिद्धांत का आधार बनता है।
याद किए स्वप्न और विश्लेषण से खोजे जा सकने वाले माने गए अर्थों में वे भेद करते हैं। संक्षेपण तथा विस्थापन जैसी प्रक्रियाएँ उनके अनुसार भीतर के विचारों का बदला रूप समझाती हैं। उदाहरण इच्छा, स्मृति और संघर्ष से जोड़ने वाला तर्क दिखाते हैं।
पुस्तक प्रभावशाली ऐतिहासिक सिद्धांत है, स्वप्न खोलने का सार्वभौमिक संकेतकोश नहीं। व्याख्या की परियोजना का विस्तार इसका आकर्षण है। प्रमाण, आत्मसमझ और अंतरंग मगर अस्पष्ट अनुभवों में अर्थ खोजने के प्रश्न पाठक के सामने आते हैं। तर्क की पहुँच के साथ उसकी मान्यताएँ भी ध्यान माँगती हैं।