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रहस्यमय अजनबी से मुलाकात मानवीय महत्त्व, नैतिक निर्णय और संसार की व्यवस्था की परिचित धारणाएँ हिला देती है। असाधारण घटनाएँ सामान्य व्याख्याएँ कम भरोसेमंद बनाती हैं। अजनबी की निर्लिप्त दृष्टि स्वीकृत विश्वासों को असहज प्रश्न बना देती है। विस्मय के साथ यह संभावना है कि समझ हमेशा सांत्वना नहीं देगी।
मार्क ट्वेन कल्पना से क्रूरता, अनुरूपता और अपनी अच्छाई की मानवीय कथाएँ परखते हैं। कृति अलग संस्करणों में बची संबंधित कथाओं के समूह का हिस्सा है। इसका आकर्षण एक सरल रोमांच तक सीमित नहीं। कल्पित परिस्थितियाँ बदलती हैं, मगर मानवीय निश्चितता को चुनौती बनी रहती है।
कथा ट्वेन के व्यंग्य का गहरा पक्ष दिखाती है। स्वतंत्रता, पीड़ा और आत्मबोध की सीमाएँ केंद्र में हैं। नैतिक आत्मविश्वास कितना अपरीक्षित मान्यताओं पर टिका है? सामान्य अनुभव से बाहर की आवाज उन्हें न माने तो क्या होता है? ये प्रश्न पाठक के साथ बने रहते हैं।