इस ऑडियोबुक के बारे में
बार्बिकेन, निकोल और मिशेल आर्दान तोप से छोड़े गए एक गोले के भीतर पृथ्वी से चंद्रमा की ओर निकल चुके हैं। अपनी योजना पर उनका विश्वास जल्द ही ऐसी परिस्थितियों से टकराता है जिन्हें छोटे से धातु के कक्ष में बैठकर पूरी तरह नियंत्रित नहीं किया जा सकता। यात्रा अप्रत्याशित दिशा लेती है। अब यात्रियों को अपने साथ लाए साधनों से ही निरीक्षण, गणना और समाधान खोजने हैं।
जूल्स वर्न गोले के सीमित स्थान में वैज्ञानिक चर्चा, अलग-अलग स्वभाव और संकट के क्षणों को साथ लाते हैं। साथी जो कुछ देखते हैं उसे समझना चाहते हैं, लेकिन जीवित रहने की व्यावहारिक आवश्यकताएँ भी उनके सामने हैं। पृथ्वी से दूरी बढ़ने पर परिचित धारणाएँ कम विश्वसनीय हो जाती हैं।
चंद्रयात्रा की यह अगली कड़ी अंतरिक्ष के प्रति जिज्ञासा और दबाव में मनुष्य की सूझबूझ को परखती है। अपने समय की वैज्ञानिक कल्पना से जुड़ा यह सफ़र खोज के आकर्षण के साथ उन यात्रियों की असुरक्षा भी दिखाता है जो साधारण परिवेश से बहुत दूर पहुँच गए हैं।