इस ऑडियोबुक के बारे में
अर्कादी किरसानोव अपने मित्र येव्गेनी बाज़ारोव के साथ परिवार की ग्रामीण जागीर लौटता है तो घर का परिचित वातावरण बदलने लगता है। चिकित्सा का युवा छात्र बाज़ारोव स्वयं को निहिलवादी कहता है। वह परंपरा से मिले प्राधिकार को अस्वीकार करके वैज्ञानिक जाँच और व्यावहारिक उपयोगिता को महत्त्व देता है। उसके दोटूक विचार अर्कादी के चाचा पावेल पेत्रोविच के अभिजात आदर्शों से टकराते हैं।
इवान तुर्गनेव का यह उपन्यास केवल युवा और पुरानी पीढ़ी के विवाद तक सीमित नहीं है। स्नेह, अहंकार और समझे जाने की इच्छा दोनों पक्षों के तर्कों को जटिल बनाते हैं। स्वतंत्र विचारों वाली विधवा अन्ना ओदिन्त्सोवा के प्रति बाज़ारोव की भावनाएँ उसके इस विश्वास को चुनौती देती हैं कि रूमानी प्रेम केवल भ्रम है। निजी अनुभव उसकी मान्यताओं की परीक्षा लेने लगता है।
उन्नीसवीं सदी के रूस की पृष्ठभूमि में यह कहानी विचार और अनुभूति के असहज संबंध को परखती है। पारिवारिक तनाव और सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक चित्रण पसंद करने वाले पाठकों को यहाँ ऐसे पात्र मिलेंगे जिनमें किसी एक पीढ़ी के पास पूरा सत्य नहीं है।