इस ऑडियोबुक के बारे में
कारामाज़ोव परिवार के जटिल संबंधों में धन, इच्छा और पुराने असंतोष का टकराव लगातार ख़तरनाक होता जाता है। फ़्योदोर पावलोविच और उनके पुत्र अलग-अलग नैतिक तथा भावनात्मक संसारों में रहते हैं, फिर भी उनके जीवन एक-दूसरे से गहरे जुड़े हैं। पारिवारिक संकट निजी शिकायतों को सार्वजनिक निर्णय का विषय बना देता है और ज़िम्मेदारी का अर्थ अनिश्चित होने लगता है।
फ़्योदोर दोस्तोयेव्स्की आस्था, संदेह और स्वयं को सही ठहराने की इच्छा से जूझते पात्रों का अनुसरण करते हैं। दिमित्री, इवान और अल्योशा अंतरात्मा की माँग तथा दूसरों के दुख का अलग-अलग उत्तर देते हैं। उनके तर्क निजी इतिहास, भावनाओं और व्यावहारिक चुनावों से अलग नहीं किए जा सकते।
मनोवैज्ञानिक तनाव के साथ यह उपन्यास स्वतंत्रता, अपराधबोध और करुणा के प्रश्न उठाता है। वह पूछता है कि मनुष्य दूसरों के प्रति कितना उत्तरदायी है। क्या ज़िम्मेदारी केवल किसी काम से शुरू होती है, या उन इच्छाओं, चुप्पियों और बचावों से भी जुड़ी है जो उस काम को संभव बनाते हैं?