इस ऑडियोबुक के बारे में
स्विट्ज़रलैंड में उपचार के बाद रूस लौटा लेव मिश्किन ऐसी दुनिया में प्रवेश करता है जहाँ प्रतिष्ठा, धन और बाहरी छवि का बहुत महत्त्व है। उसका खुलापन और दूसरों पर सहज विश्वास आसपास के लोगों की अपेक्षाएँ बदल देते हैं। प्रशंसनीय लगने वाले गुण अहंकार, प्रतिद्वंद्विता और विरोधी इच्छाओं से टकराकर ग़लतफ़हमी का कारण बन जाते हैं।
फ़्योदोर दोस्तोयेव्स्की मिश्किन को ऐसे पात्रों के बीच रखते हैं जिनकी स्नेह की आवश्यकता शर्म और अपमान के डर से उलझी है। नास्तास्या फ़िलिप्पोव्ना तथा अग्लाया के साथ उसके संबंध अलग-अलग आशाओं और माँगों को सामने लाते हैं। करुणा को किसी का उद्धार करने या उसके सुख का निर्णय स्वयं करने की इच्छा से अलग रखना भी कठिन हो जाता है।
उपन्यास निष्कपटता, पीड़ा और अच्छे इरादों की सीमाओं को परखता है। वह देखता है कि बिना लाभ की गणना किए व्यवहार करने वाला व्यक्ति उस समाज में कैसे समझा जाएगा जो दयालुता के पीछे लाभ, कमज़ोरी या अधिकार जमाने की इच्छा खोजता रहता है।