इस ऑडियोबुक के बारे में
दो पड़ोसी ज़मींदारों का झगड़ा ऐसा संघर्ष बन जाता है जो एक परिवार को बर्बाद कर देता है। धनी किरिला त्रोएकुरोव अपने प्रभाव से स्वाभिमानी लेकिन कम संपन्न आन्द्रेई दुब्रोव्स्की की जागीर छीन लेता है। पिता की मृत्यु के बाद युवा अफ़सर व्लादिमीर दुब्रोव्स्की के पास न घर बचता है, न न्याय की आशा। वह डाकू बनकर उसी व्यवस्था के विरुद्ध खड़ा हो जाता है जिसने उसे बेदखल किया है।
लेकिन त्रोएकुरोव की बेटी माशा से प्रेम उसके प्रतिशोध की योजना को उलझा देता है। शत्रु के परिवार से जुड़ी युवती ऐसी भावनाएँ जगाती है जिन्हें अपने इरादों के साथ मिलाना आसान नहीं। भेष बदलने, रहस्यों और ख़तरनाक मुलाक़ातों से कहानी आगे बढ़ती है। पात्रों के निजी निर्णयों के पीछे ज़मींदारों की व्यापक सत्ता भी दिखाई देती है।
अलेक्सांद्र पुश्किन इस रोमांचक कथा में सम्मान, अन्याय और बदले की सीमाओं के प्रश्न जोड़ते हैं। प्रेम के अंतर्विरोधों और प्रतिशोध की इच्छा तथा दूसरे जीवन की संभावना के बीच फँसे पात्रों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह एक प्रभावशाली कहानी है।