इस ऑडियोबुक के बारे में
एक अभियान आर्कटिक की बर्फ़ के पार स्थित मानी जाने वाली भूमि की खोज में निकलता है। अज्ञात क्षेत्र की संभावना भौगोलिक जिज्ञासा और इस आशा को जोड़ती है कि दुनिया में अभी ऐसे स्थान हैं जो स्वीकृत धारणाएँ बदल सकते हैं। लेकिन वहाँ पहुँचने के लिए यात्रियों को ऐसी परिस्थितियों से जूझना है जिन पर केवल उत्साह से काबू नहीं पाया जा सकता।
व्लादिमीर ओब्रुचेव अन्वेषण के रोमांच को भूविज्ञान में अपनी रुचि से जुड़ी वैज्ञानिक कल्पना के साथ मिलाते हैं। कल्पित भू-दृश्य जलवायु, जीवन और अवलोकन की सीमाओं के प्रश्न सामने लाता है। खोजें नई कठिनाइयाँ भी पैदा करती हैं। अपरिचित पर्यावरण समझना मूल खोज जितना ही महत्त्वपूर्ण हो जाता है।
उपन्यास सूझबूझ, सहयोग और विश्वसनीय ज्ञान की सीमा से बाहर जाने की अनिश्चितता को परखता है। इसका आर्कटिक संसार वैज्ञानिक संभावनाओं और जीवित रहने की माँगों से बना है। पाठक उस यात्रा का अनुसरण करता है जिसमें प्रत्येक उपलब्धि आगे के प्रश्नों और निर्णयों की शुरुआत बन जाती है।