एक व्यापारी बेटियों के लिए उपहार लाने का वादा करता है। सबसे छोटी लाल फूल माँगती है। उसे खोजते हुए व्यापारी परिचित दुनिया से बाहर ऐसे वचन में बँध जाता है जिससे निकलना आसान नहीं। बेटी की प्रतिक्रिया उसे जादुई घर में पहुँचाती है जहाँ स्वामी का रूप उसके चरित्र का भरोसेमंद परिचय नहीं देता।
सर्गेई अक्साकोव परीकथा को मौखिक कथन की भाषा और पारिवारिक भावना का ध्यान देते हैं। विस्मय तथा बेचैनी साथ बढ़ते हैं। बार बार की मुलाकातें नायिका को पहली छाप के पीछे देखना सिखाती हैं। डरावने दायित्व भी दूसरे के प्रति संवेदना असंभव नहीं बनाते।
कथा निष्ठा, कृतज्ञता और बाहरी रूप तथा आंतरिक मूल्य का संबंध देखती है। जादुई परिवेश भय और दयालुता को ठोस रूप देता है। अनजान दिखने वाली चीज से आगे दूसरे का व्यवहार देखने की तैयारी विश्वास विकसित करने का आधार बन सकती है।