इस ऑडियोबुक के बारे में
सिग्मंड फ़्रायड सुख की निजी इच्छा और दूसरों के साथ रहने की पाबंदियों का तनाव देखते हैं। सभ्यता सुरक्षा, सहयोग और साझा उपलब्धियाँ देती है। उनके अनुसार वह सामूहिक जीवन में न समाने वाली इच्छाएँ सीमित करने को भी कहती है। इसलिए सुरक्षा और असंतोष गहरे जुड़े रहते हैं।
प्रेम, आक्रामकता, धर्म और अपराधबोध की चर्चा से तर्क विकसित होता है। फ़्रायड सुझाते हैं कि सामाजिक निषेध आंतरिक माँगें बन सकते हैं। निजी इच्छा तथा सामुदायिक अपेक्षा का संघर्ष अंतरात्मा का अनुभव बन जाता है। यह व्याख्या मनोविश्लेषण के सैद्धांतिक ढाँचे और अपने ऐतिहासिक समय से संबंधित है।
निबंध मनोवैज्ञानिक अनुमान को सामाजिक तथा दार्शनिक प्रश्नों से मिलाता है। संगठित जीवन से मनुष्य क्या पाता और छोड़ता है? व्यवस्था की खोज अपने नियंत्रित किए जाने वाले तनावों से बच सकती है या नहीं? अपनापन तथा सुख के ये कठिन प्रश्न कृति की रुचि बनाए रखते हैं।