इस ऑडियोबुक के बारे में
जोसेफ़ स्विट्ज़रलैंड के एक छोटे नगर में बीते अपने बचपन को याद करता है, जहाँ संगीत और गिरजाघर का गायक-दल रोज़मर्रा के जीवन का हिस्सा थे। उसकी मित्र बेट्टी और एक असामान्य ऑर्गन निर्माता के आगमन से जुड़ी घटनाएँ इन स्मृतियों के केंद्र में हैं। बच्चों की आवाज़ों के बारे में आगंतुक के विचार परिचित अभ्यासों को भी विचित्र बना देते हैं। जोसेफ़ धीरे-धीरे वाद्ययंत्र से जुड़े एक रहस्य की ओर खिंचता जाता है।
जूल्स वर्न बच्चे के उत्साह और घबराहट को स्मृति के माध्यम से सामने लाते हैं। संगीत के स्वर उपनाम बनते हैं, मित्रता को अर्थ देते हैं और मनुष्यों को किसी व्यवस्था में बाँधने की कल्पना भी जगाते हैं। शुरू में केवल सनकी लगने वाली बातें बाद में बेचैन करने लगती हैं।
कहानी में हास्य, स्नेह और कल्पनाजनित भय साथ चलते हैं। यह वर्न की कल्पना का अलग रूप है, जहाँ एक आविष्कार, किसी वयस्क की महत्त्वाकांक्षा और बचपन के डर के बीच की सीमा धीरे-धीरे धुँधली पड़ती है।