इस ऑडियोबुक के बारे में
गृहयुद्ध के दौरान कीव में सत्ता बदलती है और तूर्बिन परिवार घर का परिचित जीवन बचाए रखने की कोशिश करता है। शहर अफवाहों, अनिश्चित निष्ठाओं और तेजी से बदलती अपेक्षाओं से भर जाता है। ऐसी अस्थिरता में स्वागत और स्नेह के साधारण संकेत भी वह महत्त्व पा लेते हैं जो सुरक्षित दिनों में कम दिखता।
मिखाइल बुल्गाकोव परिवार के अनुभव को गलियों में सक्रिय व्यापक शक्तियों से जोड़ते हैं। सैन्य फैसले और सार्वजनिक घोषणाएँ उन लोगों को प्रभावित करती हैं जो घटनाओं को आंशिक रूप से ही समझते हैं। घर के भीतरी संसार और बाहरी दबावों का अंतर रिश्तों में गर्माहट तथा असुरक्षा दोनों लाता है।
उपन्यास अपनापन, जिम्मेदारी और अर्थ बचाने के प्रयास की पड़ताल करता है, जब स्थापित व्यवस्थाएँ अधिकार खो रही हों। व्यक्तियों की दृष्टि से इतिहास की उथलपुथल दिखाई देती है। स्मृति, अनिश्चितता और दैनिक विवरण ऐसे संघर्ष के मानवीय परिणाम खोलते हैं जिसे कोई अकेला पात्र संपूर्ण नहीं समझ सकता।