इस ऑडियोबुक के बारे में
इस ऐतिहासिक और भौगोलिक रचना में जूल्स वर्न समुद्री यात्राओं तथा भौगोलिक ज्ञान के क्रमिक विकास की ओर ध्यान देते हैं। महासागर वह विशाल क्षेत्र बन जाता है जहाँ जिज्ञासा, गणना और दृढ़ता का सामना अधूरी जानकारी तथा अप्रत्याशित परिस्थितियों से होता है। यात्रा का अर्थ नए स्थान तक पहुँचने के साथ उसे समझने का प्रयास भी है।
वर्णन दिखाता है कि दूरस्थ भूभागों के बारे में धारणाएँ कैसे बनीं और नए अवलोकनों ने नक्शे कैसे बदले। तैयारी महत्त्वपूर्ण है, लेकिन सोच-समझकर चुना गया मार्ग भी ख़तरे या भूल की संभावना समाप्त नहीं करता। हर अभियान अपने पहले के अनुभवों पर निर्भर रहते हुए उनकी सीमाओं को भी परखता है।
किताब दस्तावेज़ी सामग्री और अन्वेषण के इतिहास में वर्न की रुचि से परिचय कराती है। उसका विषय ऐसे संसार को समझने की कठिनाई है जो यात्री के पुराने ज्ञान से बड़ा है। नौवहन और भूगोल में रुचि रखने वालों को यहाँ खोजों के पीछे का श्रम तथा ज्ञान संचित होने की प्रक्रिया दिखाई देती है।