इस ऑडियोबुक के बारे में
अदालत में जूरी का सदस्य बना कुलीन नेखल्युदोव एक अभियुक्त स्त्री को पहचान लेता है। वह वही युवती है जिसके जीवन को नुकसान पहुँचाने में कभी उसकी भूमिका रही थी। कात्यूशा मास्लोवा से यह सामना उसकी अपने बारे में बनाई सुविधाजनक धारणा तोड़ देता है। दूसरे की सुनवाई अब उसके अपने अतीत और वर्तमान ज़िम्मेदारियों की परीक्षा बन जाती है।
लेव तोल्स्तॉय अपराधबोध का उत्तर कर्म से देने के प्रयास के साथ न्याय तथा दंड की संस्थाओं पर प्रश्न उठाते हैं। सुधार की नेखल्युदोव की इच्छा ऐसी वास्तविकताओं से टकराती है जिन्हें केवल निजी संकल्प से नहीं बदला जा सकता। मास्लोवा का अनुभव भी उसकी अंतरात्मा को शांति देने के साधन तक सीमित नहीं किया जा सकता।
उपन्यास नैतिक जागृति, असमानता और विशेषाधिकारों पर बने जीवन को बदलने की कठिनाई के बारे में है। वह पूछता है कि हो चुके नुकसान के बाद ज़िम्मेदारी कैसी होनी चाहिए और निजी परिवर्तन की इच्छा पीड़ित लोगों पर ध्यान दिए बिना कितनी ईमानदार रह सकती है।